संतान प्राप्ति समाधान
संतान प्राप्ति में देरी के ज्योतिषीय कारणों का विश्लेषण और वैदिक उपाय — प्रत्येक दंपती के लिए आशा की किरण।

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ज्योतिष सेवा संस्थान
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Chat on WhatsAppक्या आप इन समस्याओं से परेशान हैं?
शादी के बाद सालों से संतान नहीं (No child even after years of marriage)
बार-बार गर्भपात हो जाता है (Repeated miscarriages)
डॉक्टरी जांच में सब ठीक फिर भी संतान नहीं (Medical reports normal but no child)
ज्योतिष में पंचम भाव पीड़ित है (5th house afflicted in birth chart)
पितृ दोष या नाग दोष का प्रभाव (Effect of Pitru Dosha or Naga Dosha)
गोद लेने के बाद भी संतान सुख न मिलना (No happiness even after adoption)
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुंडली में पंचम भाव, गुरु और शनि ग्रह की स्थिति संतान से जुड़ी होती है। मांगलिक दोष, पितृ दोष या गुरु की कमजोर स्थिति संतान प्राप्ति में बाधा उत्पन्न कर सकती है।
संतान गोपाल मंत्र जाप, हरिवंश पुराण पाठ, पुत्रजीवक रत्न धारण, और Navgraha Shanti puja जैसे उपाय अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं।
हाँ, पितृ दोष पूर्वजों की अतृप्त आत्माओं के कारण होता है और यह संतान प्राप्ति में बाधा उत्पन्न कर सकता है। श्राद्ध पूजा और पितृ तर्पण से इसका शमन होता है।
उपायों का असर व्यक्ति की कुंडली, भक्ति और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। सामान्यतः 3 से 6 महीने में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगते हैं।
